PM MODI : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रीलंका यात्रा के दौरान एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने भारत को भरोसा दिलाया कि उनकी जमीन का इस्तेमाल भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ कभी नहीं होने दिया जाएगा। यह बयान शुक्रवार, 4 अप्रैल 2025 को कोलंबो में पीएम मोदी की मौजूदगी में दिया गया। हालांकि राष्ट्रपति ने चीन का नाम नहीं लिया, लेकिन यह स्पष्ट संदेश हिंद महासागर में बढ़ते चीनी प्रभाव को लेकर भारत की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए देखा जा रहा है। राष्ट्रपति दिसानायके ने कहा, “हम अपनी भूमि का उपयोग भारत के खिलाफ किसी भी गतिविधि के लिए नहीं होने देंगे। भारत हमारा पड़ोसी और मित्र है, और हम इसके सुरक्षा हितों को प्राथमिकता देते हैं।” इस बयान को क्षेत्रीय कूटनीति में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है, खासकर तब जब चीन श्रीलंका में अपनी आर्थिक और सामरिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पीएम मोदी ने इस आश्वासन का स्वागत करते हुए कहा, “यह दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग का प्रतीक है। भारत भी श्रीलंका के विकास और सुरक्षा के लिए हर संभव सहायता देगा।”
इस मौके पर दोनों नेताओं ने सामपुर सौर ऊर्जा परियोजना का वर्चुअल उद्घाटन किया और रक्षा सहयोग सहित कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। यह पहला मौका है जब भारत और श्रीलंका ने रक्षा क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर औपचारिक समझौता किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों, खासकर हंबनटोटा बंदरगाह और चीनी जहाजों की मौजूदगी के जवाब में उठाया गया है। पीएम मोदी को इस यात्रा के दौरान “श्रीलंका मित्र विभूषण” पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया, जिसे उन्होंने 140 करोड़ भारतीयों के लिए समर्पित बताया। यह यात्रा 4 से 6 अप्रैल तक चलेगी, जिसमें वे अनुराधापुरा में विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और श्रीलंका के अन्य नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। इस घोषणा और सहयोग से भारत-श्रीलंका संबंधों में नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं चीन के लिए यह एक कूटनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।



