पूर्णिया: Purnea Medical College राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय पूर्णिया के सर्जरी विभाग में आज एक जटिल ऑपरेशन किया गया। यह ऑपरेशन 28 वर्षीय मिथुन कुमार मेहता का था, जो पिछले तीन महीनों से खाने-पीने में कठिनाई का सामना कर रहे थे। पारिवारिक कलह के कारण आवेश में आकर उन्होंने टॉयलेट साफ करने वाला एसिड पी लिया था, जिससे उनका आमाशय जलकर सिकुड़ गया था। इस कारण वे जो भी खाना-पीना खाते थे, वह आमाशय से आगे नहीं जा पाता था और उन्हें उल्टी हो जाती थी।मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए सर्जरी विभाग में एंडोस्कोपी की गई और बीमारी का पता चला। अब, पूर्णिया मेडिकल कॉलेज में एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी की सुविधा मिलने से जटिल रोगों का निदान सुगम हो गया है, जबकि पहले यह सुविधा केवल प्राइवेट अस्पतालों में उपलब्ध थी।रोग का पता चलने के बाद, मरीज की कमजोरी और जटिलता को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे गहन निगरानी में भर्ती किया और गैस्ट्रोजेजूनॉस्टमी ऑपरेशन किया, जिसमें छोटी आंत के कुछ हिस्से को काटकर आमाशय से जोड़ दिया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत अब बेहतर है और अगले 10 दिनों तक उसे नस के द्वारा न्यूट्रीशन दिया जाएगा, जिसके बाद भोजन देने का प्रयास किया जाएगा।चिकित्सकों की टीम को अधीक्षक डॉ. संजय कुमार ने बधाई दी और अस्पताल प्रशासन से आगे भी मदद देने का आश्वासन दिया। इस ऑपरेशन में सर्जन डॉ. तारकेश्वर कुमार, मूर्च्छक डॉ. विकास कुमार, और सहयोगी प्रमोद कुमार एवं अर्चिता पटेल ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। Post navigationPURNIA NEWS : रुपौली में कला को मिला मंच – विधायक निधि से 27 कलामंचों का निर्माण जारी” PRITHAVIRAJ CHAUHAN : मत चूको चौहान – वसन्त पंचमी का शौर्य
पूर्णिया: Purnea Medical College राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय पूर्णिया के सर्जरी विभाग में आज एक जटिल ऑपरेशन किया गया। यह ऑपरेशन 28 वर्षीय मिथुन कुमार मेहता का था, जो पिछले तीन महीनों से खाने-पीने में कठिनाई का सामना कर रहे थे। पारिवारिक कलह के कारण आवेश में आकर उन्होंने टॉयलेट साफ करने वाला एसिड पी लिया था, जिससे उनका आमाशय जलकर सिकुड़ गया था। इस कारण वे जो भी खाना-पीना खाते थे, वह आमाशय से आगे नहीं जा पाता था और उन्हें उल्टी हो जाती थी।मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए सर्जरी विभाग में एंडोस्कोपी की गई और बीमारी का पता चला। अब, पूर्णिया मेडिकल कॉलेज में एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी की सुविधा मिलने से जटिल रोगों का निदान सुगम हो गया है, जबकि पहले यह सुविधा केवल प्राइवेट अस्पतालों में उपलब्ध थी।रोग का पता चलने के बाद, मरीज की कमजोरी और जटिलता को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे गहन निगरानी में भर्ती किया और गैस्ट्रोजेजूनॉस्टमी ऑपरेशन किया, जिसमें छोटी आंत के कुछ हिस्से को काटकर आमाशय से जोड़ दिया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत अब बेहतर है और अगले 10 दिनों तक उसे नस के द्वारा न्यूट्रीशन दिया जाएगा, जिसके बाद भोजन देने का प्रयास किया जाएगा।चिकित्सकों की टीम को अधीक्षक डॉ. संजय कुमार ने बधाई दी और अस्पताल प्रशासन से आगे भी मदद देने का आश्वासन दिया। इस ऑपरेशन में सर्जन डॉ. तारकेश्वर कुमार, मूर्च्छक डॉ. विकास कुमार, और सहयोगी प्रमोद कुमार एवं अर्चिता पटेल ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।