“खेल से सशक्तिकरण की उड़ान: पूर्णिया में ‘खेले इंडिया अस्मिता किकबॉक्सिंग लीग’ की पदक विजेता बेटियों का भव्य सम्मान”

पूर्णिया: खेल, संस्कार और सशक्तिकरण का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला, जब गुलाबबाग स्थित शिवानी देवी सरस्वती विद्या मन्दिर में वाको इंडिया किक बॉक्सिंग एसोसिएशन पूर्णिया के तत्वावधान में “खेले इंडिया अस्मिता किकबॉक्सिंग लीग” में पदक जीतने वाली सभी बेटियों के सम्मान में भव्य एथलेटिक सम्मान समारोह का सफल आयोजन किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में खिलाड़ी, अभिभावक, खेल प्रेमी, शिक्षक एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय विधायक पूर्णिया सदर श्री विजय कुमार खेमका, उप महापौर नगर निगम पूर्णिया श्रीमती पल्लवी गुप्ता, प्रेस क्लब पूर्णिया के अध्यक्ष नंद किशोर सिंह, सीमांचल प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ऑफ पूर्णिया के मनोरंजन जी तथा समाजसेवी विनोद सिन्हा जी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया। स्वागतम गीत के साथ आरंभ हुए इस समारोह ने सांस्कृतिक गरिमा और खेल भावना—दोनों का सुंदर संदेश दिया।विद्यालय के शिक्षकों ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं ग्रामीण और शहरी प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रही हैं। वहीं, पूर्णिया किकबॉक्सिंग एसोसिएशन के जनरल सेक्रेट्री संतोष चौहान ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।


कार्यक्रम में शिवानी देवी सरस्वती विद्या मन्दिर, न्यू पूर्णिया पब्लिक स्कूल, नवोदय विद्यालय तथा किलकारी के छात्र-छात्राओं ने अपने शिक्षकों के साथ सहभागिता की। आयोजन को सफल बनाने में पूर्णिया किकबॉक्सिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष अनीकेत कुमार सिंह, महासचिव संतोष चौहान तथा सरस्वती विद्या मन्दिर गुलाबबाग के सरोज सुमन जी, किशोर सर जी, उषा बहन जी, विभूति सर जी और भूमिनाथ साह जी का विशेष योगदान रहा। वक्ताओं ने कहा कि किक बॉक्सिंग जैसे खेल बच्चों को केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि अनुशासन, साहस, आत्मसंयम और आत्मरक्षा के गुणों से भी समृद्ध करते हैं। आज सम्मानित की गईं होनहार बेटियां निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगी।

पूर्णिया के युवा खेल के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और सरकार भी भविष्य में ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहित करती रहेगी। इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं में आत्मरक्षा, खेल भावना और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना था, जिसे खिलाड़ियों ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से पूरी तरह सिद्ध कर दिखाया।

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