अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति चौराहे पर, ये 4 बड़े सवाल तय करेंगे सत्ता का अगला रास्ता

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र की राजनीति उस समय गहरे असमंजस और उथल-पुथल में घिर गई, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख, उपमुख्यमंत्री और राज्य के वित्त मंत्री अजित पवार का असामयिक निधन हो गया। अजित पवार न केवल सत्ता और संगठन का मजबूत स्तंभ थे, बल्कि बारामती जैसे राजनीतिक गढ़ की पहचान भी थे। उनके जाने से एक साथ कई मोर्चों पर रिक्तता पैदा हो गई है—सरकार में, पार्टी में और जमीनी राजनीति में।

सबसे पहला और बड़ा सवाल महाराष्ट्र के अगले उपमुख्यमंत्री को लेकर है। एनसीपी खेमे में अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार का नाम सबसे आगे चल रहा है, जिन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं का भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल, ओबीसी चेहरे के तौर पर छगन भुजबल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे के नाम भी चर्चा में हैं। दूसरा अहम सवाल बजट को लेकर है, क्योंकि अजित पवार वित्त मंत्री थे और 2026 का बजट जल्द पेश होना है।

संवैधानिक व्यवस्था के तहत फिलहाल वित्त विभाग मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास गया है और ऐसे में संभावना है कि वही बजट पेश करें। तीसरा बड़ा मुद्दा बारामती विधानसभा सीट का है, जो दशकों से पवार परिवार का अभेद्य किला रही है। अजित पवार के बाद यहां उत्तराधिकारी कौन होगा, इस पर अटकलें तेज हैं—पत्नी सुनेत्रा पवार, बेटे पार्थ और जय पवार, भतीजे रोहित पवार और युगेंद्र पवार जैसे नाम सामने हैं। चौथा और सबसे निर्णायक सवाल NCP के राष्ट्रीय नेतृत्व का है। अजित पवार के नेतृत्व में पार्टी ने अलग राह पर मजबूत पकड़ बनाई थी, लेकिन अब संगठन को संभालने के लिए अनुभवी चेहरे की जरूरत है।

इस रेस में सबसे मजबूत दावेदार प्रफुल्ल पटेल माने जा रहे हैं, जबकि सुनेत्रा और पार्थ पवार के नाम भी चर्चा में हैं। पार्टी के भीतर यह सहमति बनती दिख रही है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी अलग-अलग नेताओं को दी जाए। कुल मिलाकर अजित पवार का जाना केवल एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसे अध्याय का अंत है, जिसके बाद सत्ता, संगठन और उत्तराधिकार को लेकर लिए जाने वाले फैसले राज्य की राजनीति की दिशा और दशा तय करेंगे।