पटना की सड़कों पर उतरा इतिहास! हेरिटेज वॉक से खुले ‘बिहार म्यूजियम बिएनाले 2025’ के राज, दुनिया देखेगी साझी विरासत का जलवा!

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पटना: बुधवार की सुबह पटना में कुछ अलग थी। न मौसम बदला था, न शहर की रफ्तार… लेकिन हवा में एक अलग सी सरगोशी थी। सुबह 6:30 बजे, जैसे ही बिहार म्यूजियम बिएनाले 2025 का आगाज़ हेरिटेज वॉक से हुआ, मानो इतिहास की परतें खुद-ब-खुद खुलने लगीं। बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने जब झंडी दिखाई, तो सड़कों पर एक जुलूस नहीं, एक जिंदा इतिहास चल पड़ा—600 से ज्यादा लोगों के कदमों से!

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पटना म्यूजियम से बिहार म्यूजियम तक के सफर में हर ईंट, हर दीवार और हर मोड़ जैसे कुछ कह रहे थे—कभी पाटलिपुत्र की राजधानी रही इस ज़मीन पर अब फिर से दुनिया की नज़रें टिकने वाली हैं। बच्चे, बुज़ुर्ग, इतिहासप्रेमी—सबने हाथों में तख्तियां थामीं, जिन पर लिखा था: “धरोहर हमारी क्या मांगे – थोड़ा सम्मान, थोड़ा प्यार, पूरी सफाई!” और इस साल की थीम? “ग्लोबल साउथ: साझी विरासत”—मतलब अब केवल भारत नहीं, इंडोनेशिया, पेरू, श्रीलंका, कजाखस्तान, मैक्सिको, अर्जेंटीना जैसे देशों की सांस्कृतिक कहानियां भी बिहार की मिट्टी से जुड़ने जा रही हैं।

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लेकिन रुकिए… सबसे बड़ा खुलासा तो अभी बाकी है!
7 अगस्त को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस बिएनाले का विधिवत उद्घाटन करेंगे, जहां देश-विदेश के विद्वान, कलाकार और क्यूरेटर जुटेंगे। और ये कोई आम प्रदर्शनी नहीं—यह दुनिया का पहला म्यूजियम-केंद्रित बिएनाले है, जो 31 दिसंबर तक पटना को सांस्कृतिक विश्व मानचित्र पर चढ़ा देगा। तो तैयार हो जाइए! क्योंकि जो अब तक सिर्फ किताबों में पढ़ा था, वो अब आपकी आंखों के सामने जिंदा होने वाला है। ये सिर्फ एक आयोजन नहीं… ये एक सांस्कृतिक क्रांति है। 

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