यूपी में SIR से बदली सियासी गणित, 2027 से पहले सपा-बीजेपी दोनों के लिए नई चुनौती

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम कटौती (SIR) को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है और सामने आए आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि इसका असर समाजवादी पार्टी और बीजेपी—दोनों पर पड़ा है, हालांकि नुकसान का पैमाना अलग-अलग दिख रहा है।

2024 लोकसभा चुनाव में जिन सीटों पर बीजेपी जीती थी, वहां कई जिलों में 20 से 30 फीसदी तक मतदाताओं के नाम कटे हैं, जबकि सपा की जीती सीटों वाले इलाकों में यह कटौती आमतौर पर 15 से 25 फीसदी के बीच रही। इससे यह बहस तेज हो गई है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में किसे फायदा और किसे नुकसान होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि केवल प्रतिशत के आधार पर किसी एक पार्टी को जिम्मेदार ठहराना या निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, क्योंकि असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि किन वर्गों, समुदायों और बूथों के मतदाताओं के नाम हटे हैं। फिलहाल SIR ने यूपी की राजनीति में अनिश्चितता जरूर बढ़ा दी है और दोनों प्रमुख दलों के लिए रणनीति दोबारा गढ़ने की जरूरत खड़ी कर दी है।

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