विधायक शंकर सिंह का बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा, कहा—”स्थिति अब भी भयावह, सरकार तत्काल बढ़ाए राहत कार्य”

पूर्णिया, अभय कुमार सिंह: प्रखंड क्षेत्र में बाढ़ का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन हालात अब भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। सड़कों पर कई फुट तक पानी का बहाव जारी है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त है। बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करने पहुंचे विधायक शंकर सिंह ने कहा कि “हालात कछुए की चाल से सुधर रहे हैं, लेकिन आम जनता की पीड़ा अब भी वैसी ही है। लोग पिछले कई दिनों से भगवान भरोसे, तिरपालों और ऊंची जगहों पर किसी तरह दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं।”

विधायक ने टोपड़ा बिंदटोली, सहोड़ा दियारा, शांतिनगर, उचित मडडटोला, साधुपुर, मंझोडीह, जंगलटोला, कोशकीपुर, सिमड़ा, पुरानी नंदगोला, नई नंदगोला, सपाहा, डुमरी, बैरिया, हरनाहा, मेहदी, श्रीमाता, बघवा, दीना सिंह बासा, अंझरी, विजय, मोहनपुर, बनकटा, डोभा, इस्लामपुर, छर्रापटी, टीकापटी, गोढिहारी जैसे दर्जनों गांवों का दौरा किया और वहां के हालात का जायजा लिया।

उन्होंने बताया कि “इन इलाकों में लोग पीने के पानी, भोजन और दवाइयों के लिए जूझ रहे हैं। कुछ जगहों पर प्रशासन की ओर से सामुदायिक किचन चलाए जा रहे हैं, लेकिन कई गांव अभी भी उपेक्षित हैं, जहां तत्काल राहत पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।” विधायक शंकर सिंह ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री से मांग की कि “बाढ़ प्रभावित सभी इलाकों में सामुदायिक किचन चालू करवाया जाए और राहत सामग्री—जैसे सूखा राशन, पीने का पानी, दवाइयां और कपड़े—जल्द से जल्द पीड़ितों तक पहुंचाई जाए।”

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उन्होंने याद दिलाया कि “2022 में इसी तरह की भयावह बाढ़ आई थी, तब मुख्यमंत्री स्वयं क्षेत्र में पहुंचे थे और व्यापक राहत कार्य चलाया गया था। आज फिर वैसी ही स्थिति बन गई है, और सरकार को उसी तत्परता के साथ काम करना होगा।” ग्रामीणों ने विधायक के सामने अपनी पीड़ा रखी—टूटी सड़कों, डूबे घरों, स्कूलों में शरण लिए लोगों और बीमार पड़ते बच्चों की चिंता जताई। कई इलाकों में अभी तक सरकारी सहायता न पहुंच पाने की शिकायतें भी सामने आईं।

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विधायक ने आश्वासन दिया कि वे बाढ़ पीड़ितों की आवाज विधानसभा और सरकार तक मजबूती से पहुंचाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक हालात सामान्य नहीं होते, वे खुद लगातार क्षेत्र में बने रहेंगे और राहत कार्यों की निगरानी करते रहेंगे। “यह समय राजनीति का नहीं, सेवा का है। हम सबको मिलकर बाढ़ पीड़ितों के दर्द को बांटना होगा और हरसंभव सहायता करनी होगी,” उन्होंने कहा। बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे इन गांवों में अब राहत और पुनर्वास की तत्काल आवश्यकता है। ग्रामीणों की निगाहें अब सरकार और प्रशासन की ओर टिकी हैं।

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