PURNIA NEWS : टीबी (यक्ष्मा) जैसी गंभीर संक्रामक बीमारी के खिलाफ टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा मंगलवार को जिला यक्ष्मा केंद्र, पूर्णिया में 165 टीबी मरीजों को पोषण युक्त फूड बास्केट का वितरण किया गया। यह वितरण टाटा कंपनी के बीएमडब्लू वेंचर लिमिटेड, पटना और जिला संचारी रोग नियंत्रण पदाधिकारी (CDO) डॉ कृष्ण मोहन दास की संयुक्त पहल पर हुआ। इस अवसर पर डॉ दास ने कहा, “टीबी के इलाज के साथ-साथ पोषण उतना ही ज़रूरी है। सक्षम लोग टीबी मरीजों को ‘निक्षय मित्र’ बनकर गोद लें और उनके उपचार तक पोषण की जिम्मेदारी निभाएं।” उन्होंने बताया कि अब तक जिले में 400 से अधिक निक्षय मित्रों द्वारा 2000+ मरीजों को फूड बास्केट प्रदान की जा चुकी है।कार्यक्रम में विशेषज्ञ डॉ दिनेश कुमार ने बताया कि दो हफ्ते से अधिक की खांसी, वजन में गिरावट, रात में पसीना आना जैसे लक्षणों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। समय पर जांच और नियमित दवा सेवन से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों, स्वयंसेवकों, TB चैंपियन और NGO प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल पोषण सहायता देना था, बल्कि यह संदेश भी देना था कि टीबी लाइलाज नहीं, बल्कि इलाज योग्य है — जरूरत है समय पर पहचान और सामुदायिक सहयोग की। Post navigationPURNIA NEWS : पुलिस अधीक्षक स्वीटी सहरावत ने किया प्रशिक्षु सिपाहियों के लिए जीविका दीदी रसोईघर का उद्घाटन Purnia News: ओवरलोड ट्रैक्टर की चपेट में आकर युवक की मौत, ग्रामीणों ने किया सड़क जाम
PURNIA NEWS : टीबी (यक्ष्मा) जैसी गंभीर संक्रामक बीमारी के खिलाफ टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा मंगलवार को जिला यक्ष्मा केंद्र, पूर्णिया में 165 टीबी मरीजों को पोषण युक्त फूड बास्केट का वितरण किया गया। यह वितरण टाटा कंपनी के बीएमडब्लू वेंचर लिमिटेड, पटना और जिला संचारी रोग नियंत्रण पदाधिकारी (CDO) डॉ कृष्ण मोहन दास की संयुक्त पहल पर हुआ। इस अवसर पर डॉ दास ने कहा, “टीबी के इलाज के साथ-साथ पोषण उतना ही ज़रूरी है। सक्षम लोग टीबी मरीजों को ‘निक्षय मित्र’ बनकर गोद लें और उनके उपचार तक पोषण की जिम्मेदारी निभाएं।” उन्होंने बताया कि अब तक जिले में 400 से अधिक निक्षय मित्रों द्वारा 2000+ मरीजों को फूड बास्केट प्रदान की जा चुकी है।कार्यक्रम में विशेषज्ञ डॉ दिनेश कुमार ने बताया कि दो हफ्ते से अधिक की खांसी, वजन में गिरावट, रात में पसीना आना जैसे लक्षणों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। समय पर जांच और नियमित दवा सेवन से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों, स्वयंसेवकों, TB चैंपियन और NGO प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल पोषण सहायता देना था, बल्कि यह संदेश भी देना था कि टीबी लाइलाज नहीं, बल्कि इलाज योग्य है — जरूरत है समय पर पहचान और सामुदायिक सहयोग की।