पटना: राज्य में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत व्यापक और गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल सुनिश्चित की जा रही है। वर्ष 2025–26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान एक लाख 87 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं की जांच की गई है। यह उपलब्धि तब और अहम हो जाती है जब यह ध्यान में रखा जाए कि राज्य सरकार द्वारा हाल ही में इस अभियान के तहत जांच के दिनों को दो से बढ़ाकर हर माह तीन दिन—9, 15 और 21 तारीख—कर दिया गया है। इसका उद्देश्य मातृ और नवजात मृत्यु दर को कम करना है।

इस अभियान के अंतर्गत 13,691 उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.3% अधिक है। इन सभी मामलों को ट्रैक कर बेहतर चिकित्सा सुविधा से जोड़ा गया है। एचएमआईएस आंकड़ों के अनुसार भागलपुर, कैमुर, कटिहार, पूर्णिया और जमुई जैसे जिलों ने इस वर्ष हाई-रिस्क पहचान में उल्लेखनीय सुधार किया है, जबकि बांका, पटना, नवादा और सहरसा सर्वाधिक एएनसी (Antenatal Care) जांच कराने वाले जिलों में शामिल हैं।

पटना की रहने वाली मुन्नी देवी (बदला हुआ नाम) बताती हैं, “आशा दीदी ने मुझे जांच के लिए प्रेरित किया। मुझे 7 महीने का गर्भ है और अभी दो दिन पहले तीसरी बार प्रसवपूर्व जांच करवाई। डॉक्टर ने बताया कि मेरा बच्चा और मैं दोनों स्वस्थ हैं, और अगली जांच कब करनी है, इसकी जानकारी भी दे दी गई।” पीएमएसएमए की शुरुआत 2016 में प्रधानमंत्री द्वारा की गई थी, जिसके तहत विशेषज्ञ डॉक्टर हीमोग्लोबिन, शुगर, एचआईवी और अल्ट्रासाउंड जैसी जांच करते हैं। आवश्यकता पड़ने पर गर्भवती महिलाओं को उच्चतर स्वास्थ्य केंद्रों पर रेफर किया जाता है।

फॉग्सी की पूर्व अध्यक्ष डॉ. मीना सावंत बताती हैं कि पहली तिमाही में चार प्रसवपूर्व जांच अनिवार्य हैं, जिससे प्री-एक्लेम्पसिया, गर्भावधि मधुमेह और एनीमिया जैसे हाई-रिस्क फैक्टर्स का समय रहते पता चल सके। उनका मानना है कि खासकर किशोरियों और नवविवाहित महिलाओं के लिए यह जांचें जीवनरक्षक साबित होती हैं।विशेषज्ञों का सुझाव है कि पीएमएसएमए और वीएचएनडी (VHND) डेटा का समेकित विश्लेषण कर सेवा अंतराल की पहचान की जाए, ताकि अंतिम छोर तक स्वास्थ्य सेवाएं समय पर पहुंचाई जा सकें। यह पहल राज्य को सुरक्षित मातृत्व के रास्ते पर मजबूती से आगे ले जा रही है।

By अंग इंडिया न्यूज़

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