PURNEA NESWS/विधि संवाददाता: 8 मार्च को आयोजित साल प्रथम राष्ट्रीय लोक अदालत में 2985 मामलों का किया गया निष्पादन। इसमें बैंक ऋण के 1417 मामले मामलों में 8 करोड़ 81 लाख 31 हजार 881 रुपए का समझौता हुआ। तत्काल वसूली 3 करोड़ 65 हजार 447 रुपए हुई। बैंक ऋण में यथासंभव पक्षकारों को सूद की राशि में छूट दी गई। बीएनएलएस के 51 मामलों का निष्पादन किया गया। जिसमें समझौता राष्ट्रीय 65 हजार 707 रुपए तथा तत्काल वसूली 62 हजार 414 रुपए की हुई। ट्रैफिक चालान के 897 मामलों का निष्पादन किया गया जिसमें 11 लाख 74 हजार रुपए की वसूली हुई। वैवाहिक (तलाक को छोड़कर) 12 मामले समझौता के द्वारा निष्पादित किए गए। बिजली के 155 मामलों में 8 लाख 25 हजार 982 रुपए वसू कर मामले को समाप्त किया गया। क्लेम के 1 वाद में बीमा कंपनी द्वारा 10 लाख रुपए दावाकर्ता को देने का समझौता किया गया। निष्पादन वाद के 10, चेक बाउंस के 50 तथा कोर्ट में लंबित शामनीय अपराधिक 392 वादों का समझौता के आधार पर निष्पादन किया गया।

शनिवार को साल के प्रथम देशव्यापी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन था। इस मौके पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कन्हैया जी चौधरी, जिला पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं अन्य गणमान्य लोगों ने दीप प्रज्वलन कर इस समारोह की शुरुआत की। इस मौके पर अन्य न्यायाधीश, पदाधिकारी वह पक्षकार गण मौजूद थे। राष्ट्रीय लोक अदालत में वादों के निष्पादन हेतु 15 बेंच का गठन किया गया था। वही बनमनखी, धमदाहा व बायसी अनुमंडल में एक-एक बेंच का गठन किया गया था। जिसमें न्यायाधीशों के साथ पैनल अधिवक्ताओं ने भी शिरकत की। इसमें अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश क्रमशः जितेश कुमार, अभिषेक रंजन, एन० के० प्रियदर्शी, सितेश कुमार, धर्मेंद्र सिंह, रंजन कुमार रैना, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राधा कुमारी, सब जज प्रथम प्रमोद रंजन, अनुमंडलीय न्याय के दंडाधिकारी श्वेता शारदा, सदर मुंसिफ प्रभात कुमार रंजन, प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी क्रमशः स्निग्धा, प्रशांत कुमार, अनुराग, अमित कुमार, सुवर्णा नारायण इसके अलावा पैनल अधिवक्ता क्रमशः सुतापा साह, राजीव कुमार, महेश चंद्र द्विवेदी, मोहम्मद कासिम नदीम, कुश नाथ झा, रंजीत कुमार चौधरी, लक्ष्मण प्रसाद, राजीव कुमार, ममनून आलम, किशोर कुमार पाठक, वंदना कुमारी, रुखसार तरन्नुम, रूबी कुमारी व मनोज कुमार ने भी लोक अदालत में वादों के निपटारा में कार्य किया। इसके अलावा पांच हेल्प डेस्क भी बनाए गए थे। जिसमें पाराविधिक स्वयंसेवक को नियुक्त किया गया था, ताकि पक्षकारों को अपना बेंच खोजने में दिक्कत नहीं हो। महिला व पुरुष पुलिस बल की भी तैनाती की गई थी।
इस राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिकाधिक मामलों के निष्पादन हेतु न्यायालय में लम्बित लगभग 5500 और पूर्व-वाद के लगभग 31,000 पक्षकारों को नोटिस भेजा गया था।

By अंग इंडिया न्यूज़

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