सहरसा, अजय कुमार: Chhath Puja 2025 ब्रज किशोर ज्योतिष संस्थान डॉ रहमान चौक सहरसा बिहार के संस्थापक एवं प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा जी ने बतलाया है की छठ महापर्व की लोकप्रियता आज देश-विदेश तक देखने को मिलती है। छठ पूजा का व्रत कठिन व्रतों में एक होता है। इसमें पूरे चार दिनों तक व्रत के नियमों का पालन करना पड़ता है और व्रती पूरे 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं। छठ पूजा में नहाय खाय,खरना, अस्ताचलगामी अर्घ्य और उषा अर्घ्य का विशेष महत्व होता है।
मिथिला विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार,पहला दिन नहाय खाय 25 अक्टूबर, दूसरा दिन खरना 26 अक्टूबर, तीसरा दिन अस्तचलगामी सूर्य को अर्घ्य 27 अक्टूबर तथा आखिरी व चौथे दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य 28 अक्टूबर को है। छठ पर्व मूलतः सूर्य की आराधना का पर्व है। जिसे हिन्दू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। हिन्दू धर्म के देवताओं में सूर्य ऐसे देवता हैं जिन्हें मूर्त रूप में देखा जा सकता है। प्रात:काल में भगवान सूर्य और सायंकाल में भी भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर प्रणाम कर अर्घ्य देकर मन्नतें मांगी जाती है सूर्य देव एवं छठी मैया सभी भक्तो के मनोकामना को पूर्ण करते हैं।



