पूर्णिया: पूर्णिया एयरपोर्ट के उद्घाटन कार्यक्रम में जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बड़ी घोषणाएं कीं, वहीं मंच पर एक पल ऐसा भी आया जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। आमतौर पर मुखर विरोधी माने जाने वाले सांसद पप्पू यादव और प्रधानमंत्री मोदी के बीच मंच पर अचानक हुई मुलाक़ात और मुस्कराते हुए बातचीत ने माहौल ही बदल दिया। पप्पू यादव ने हाथ जोड़कर प्रधानमंत्री का अभिवादन किया और झुककर कुछ कहा, जिस पर पीएम न सिर्फ़ मुस्कुराए, बल्कि ज़ोर से ठहाका लगाते भी दिखे।उनके ठीक बगल बैठे राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी इस बातचीत में रुचि लेते हुए मुस्कुराते नज़र आए। मंच पर मौजूद कई दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में यह मुलाकात जितनी अप्रत्याशित थी, उतनी ही संकेतपूर्ण भी। राजनीतिक पंडित इस दृश्य को यूं ही नहीं देख रहे—जो नेता अब तक तीखे तेवरों के लिए पहचाने जाते थे, उनका इस तरह सधे अंदाज में मिलना क्या आने वाले किसी नए समीकरण की आहट है? क्या कोई सियासी मोड़ सामने है या यह सिर्फ़ एक शिष्टाचार भेंट थी? मंच पर कुछ मिनटों की यह गुफ्तगू अब कई सवाल छोड़ गई है, जिनका जवाब आने वाला वक्त ही देगा। Post navigationसीमांचल के इस ऐतिहासिक क्षणों के लिए वे प्रधानमंत्री जी एवं मुख्यमंत्री जी को दिल से बधाई देते हैं: शंकर सिंह PURNIA NEWS : एयरपोर्ट पर कांग्रेस का हमला, कहा– चुनावी मौसम में एनडीए ले रहा है झूठा श्रेय
पूर्णिया: पूर्णिया एयरपोर्ट के उद्घाटन कार्यक्रम में जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बड़ी घोषणाएं कीं, वहीं मंच पर एक पल ऐसा भी आया जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। आमतौर पर मुखर विरोधी माने जाने वाले सांसद पप्पू यादव और प्रधानमंत्री मोदी के बीच मंच पर अचानक हुई मुलाक़ात और मुस्कराते हुए बातचीत ने माहौल ही बदल दिया। पप्पू यादव ने हाथ जोड़कर प्रधानमंत्री का अभिवादन किया और झुककर कुछ कहा, जिस पर पीएम न सिर्फ़ मुस्कुराए, बल्कि ज़ोर से ठहाका लगाते भी दिखे।उनके ठीक बगल बैठे राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी इस बातचीत में रुचि लेते हुए मुस्कुराते नज़र आए। मंच पर मौजूद कई दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में यह मुलाकात जितनी अप्रत्याशित थी, उतनी ही संकेतपूर्ण भी। राजनीतिक पंडित इस दृश्य को यूं ही नहीं देख रहे—जो नेता अब तक तीखे तेवरों के लिए पहचाने जाते थे, उनका इस तरह सधे अंदाज में मिलना क्या आने वाले किसी नए समीकरण की आहट है? क्या कोई सियासी मोड़ सामने है या यह सिर्फ़ एक शिष्टाचार भेंट थी? मंच पर कुछ मिनटों की यह गुफ्तगू अब कई सवाल छोड़ गई है, जिनका जवाब आने वाला वक्त ही देगा।