PURNIA NEWS : पूर्णिया विश्वविद्यालय, पूर्णिया के सैकड़ों छात्र-छात्राएँ आज भी स्नातक पार्ट-वन की अंकपत्रिका और प्रमाण-पत्र के इंतजार में दर-दर भटक रहे हैं। वर्षों से आवेदन करने और परीक्षा विभाग के लगातार चक्कर लगाने के बावजूद अब तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की घोर लापरवाही और उदासीन रवैये के कारण उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है। छात्रों का कहना है कि अंकपत्रिका न मिलने से न तो उन्हें प्रोविजनल प्रमाण-पत्र मिल पा रहा है और न ही मूल प्रमाण-पत्र। ऐसे में उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के अवसर उनसे छिनते जा रहे हैं। छात्राओं ने बताया कि परीक्षा विभाग में पदाधिकारी आवेदन तो ले लेते हैं, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कार्यवाही नहीं करते। गेट पर ताला लगाकर छात्रों को बाहर खड़ा कर दिया जाता है और घंटों धूप में इंतजार करवाया जाता है। छात्रों का दर्द है कि उन्हें अपने ही विश्वविद्यालय में कैदी जैसा महसूस कराया जा रहा है।
इस बीच एसटीईटी (STET) जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं की अंतिम तिथि नजदीक है। प्रमाण-पत्र के अभाव में सैकड़ों छात्रों का भविष्य अंधकार में धकेला जा रहा है। परीक्षा नियंत्रक के हालिया बयान ने छात्रों के आक्रोश को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा— “बिस्किट का डब्बा रखते हैं, हम खोज कर दे देंगे। इसमें समय लगेगा, कोई निश्चित समय नहीं है। चार साल दौड़े हो, अब एक दिन में तो काम नहीं होगा।” यह बयान छात्रों की पीड़ा के साथ खिलवाड़ और विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण है। छात्रों ने महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, यूजीसी और विश्वविद्यालय कुलपति से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते अंकपत्रिका और प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। छात्रों के मुताबिक विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही ने उन्हें ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां उनका शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य दोनों ही खतरे में पड़ गए हैं।



