सहरसा, अजय कुमार : दो दिवसीय जिलास्तरीय राष्ट्रीय खाद्य तेल-तेलहन मिशन प्रशिक्षण का आयोजन ई॰-किसान भवन, सिमरी बख्तियारपुर में किया गया। जिसका विधिवत उद्घाटन जिला कृषि पदाधिकारी सह-सदस्य सचिव, राष्ट्रीय खाद्य तेल-तेलहन मिशन की अध्यक्षता में किया गया। प्रशिक्षण का उद्घाटन जिला कृषि पदाधिकारी संजय कुमार, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी मो कौशीन अख्तर, परामर्शी, सहायक निदेशक शष्य डा मनोज प्रियदर्शी,रमेश कुमार रमण, सहायक निदेशक बीज विश्लेषण रमेश कुमार,विकास कुमार, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, सिमरी बख्तियारपुर, VCP संजीव कुमार, एवं प्रखंडस्तरीय कृषि समन्वयक, ATM/BTM एवं किसान सलाहकार की उपस्थिति में दीप प्रज्जवलित कर किया गया। अनुमंडल कृषि पदाधिकारी सिमरी बख्तियारपुर द्वारा बताया गया कि तेल-तेलहन फसलों के लिए की ठंडी जलवायुु, दोमट या काली मिट्टी (PH 5.5.7.5) सिंचित अवस्था में प्रायः अक्टूबर माह में ही बुवाई की जानी चाहिए। राई-सरसों के साथ मुख्य फसलें तेलहनी फसल के रूप में उगाई जाती है। इनमें तोरिया, गोभी सरसों, भूरी सरसों, तारामीरा, सरसों समूह और राई एवं करन राई, राई समूह की मुख्य फसलें हैं। जिसका मुख्य उपयोग आचार, मसाला, मानव उपभोग के लिए तेल, खाना पकाने एवं तलने में किया जाता है।
डॉ नदीम कुमार, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र, अगवानपुर द्वारा बताया गया कि तेलहन फसलों की वैज्ञानिक खेती, मिट्टी का चयन, खेत की तैयारी, बीजोपचार, खाद एवं उर्वरक प्रंबधन, सिंचाई प्रबंधन, निकाई-गुराई एवं खर-पतरवार प्रबंधन, कीट-बीमारी प्रबंधन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गयी। उनके द्वारा बताया गया कि तेलहन बीजों को बीज जनित रोग से बचाने के लिए फफूंद नाशकों से बीजोपचार करना आवश्यक है। बुआई से पहले बीजों को कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत डब्लू पी 2.0 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करना चाहिए। भूमि की गहरी जुताई खेत समतल करें, जैविक खाद एवं जैव फफूंदनाशी (Trichoderma) बुवाई के पहले बीज का उपचार आवश्यक रूप से करना चाहिए। पहले सिंचाई बुवाई से 25-30 दिन दूसरी 60-70 दिन पर करनी चाहिए। सरसों के खेत में माहो कीट का प्रकोप अधिक होता है। इसके लिए थायामिथोक्साम 25 प्रतिशत डब्लू जी 1.0 ग्राम प्रति तीन लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव ससमय करने का सुझाव दिया गया।वेल्यू चेन पार्टनर संजीव कुमार, प्रो॰- सिमरी बख्तियारपुर एग्रो प्रोड्क्ट कंपनी लिमिटेड द्वारा थ्च्व् के गठन एवं किसानों के उत्पाद खरीद बिक्री के संबंध में विस्तृत जानकारी दिया गया, उनके द्वारा तेलहन की खेती से किसानों की आय में वृद्धि तथा खेतों मे अधिक उत्पादन के संबंध में जानकारी दी गई।जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि तेलहन का महत्व खान-पान में महत्व है। विभाग द्वारा चलाये जा रहे विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए तेलहन उत्पादन को प्राथमिकता देने एवं इससे भविष्य में मिलने वाले रोजगार की भी जानकारी दी गई। विभाग द्वारा तेल प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने के लिए इच्छुक किसान, थ्च्व् आदि के लिए ऑनलाईन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। 10 टन क्षमता के इकाई स्थापित करने के लिए 9.90 लाख रूपये प्रति इकाई का अनुदान या प्रोजेक्ट लागत का 33 प्रतिशत अनुदान किसानों को मिलेगा। सहरसा जिले में तेल-तेलहन प्रसंस्करण इकाई हेतु कुल 02 लक्ष्य प्राप्त है। जिसमें आवेदकों का चयन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया जायेगा। जिला परामर्शी NFSM डॉ मनोज सिंह द्वारा बताया गया कि तेल-तेलहन मिशन के व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए एवं इससे मिलने वाले लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दिया गया।
दो दिवसीय जिलास्तरीय राष्ट्रीय खाद्य तेल-तेलहन मिशन प्रशिक्षण का आयोजन

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