पूर्णियाँ: भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णियाँ में मखाना हार्वेस्टिंग (बुहराई) मशीन का सफल परीक्षण किया गया। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर के नेतृत्व में कई वर्षों के शोध के बाद विकसित यह मशीन पारंपरिक विधि की तुलना में कम समय, कम लागत और कम श्रमिक की आवश्यकता में सक्षम है। इसका प्रयोग एक बार में अधिकतम बीज निकालने में मदद करेगा।
कुलपति डॉ॰ डी॰ आर॰ सिंह ने कहा कि यह मशीन मखाना किसानों के लिए लाभकारी साबित होगी और मखाना विकास में अहम भूमिका निभाएगी। इस मशीन को महाविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ॰ डी॰ के॰ महतो, ईंजीनियर मोहन कुमार सिन्हा और डॉ॰ आषीष रंजन ने विकसित किया है। मशीन बिजली संचालित है, 95 किलोग्राम वजन की है और इसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से ले जाया जा सकता है। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी वैज्ञानिक, छात्र-छात्राएँ, आर॰पी॰एल॰ के प्रशिक्षणार्थी और बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के मीडिया सेल के सदस्य उपस्थित थे।
इसके साथ ही बिहार कौशल विकास मिशन के अंतर्गत आयोजित दस दिवसीय आर॰पी॰एल॰ प्रशिक्षण में उत्तीर्ण 42 प्रतिभागियों को प्राचार्य सह अधिष्ठाता डॉ॰ डी॰ के॰ महतो ने प्रमाण पत्र वितरित किए। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक और कर्मचारी भी उपस्थित थे, जिन्होंने इस सफल परीक्षण पर खुशी व्यक्त की। यह कदम न केवल मखाना उत्पादक किसानों के लिए तकनीकी सहयोग बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्र में कृषि विकास और उत्पादकता को भी प्रोत्साहित करेगा।



