MHAND ठाकुरगंज कॉलेज में कॉलेज प्रशासन द्वारा छात्रों को FIR की धमकी देने का आरोप, छात्र नेता ने उठाई निष्पक्ष जाँच की माँग

पूर्णियाँ : पूर्णियाँ विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले एमएचएएनडी डिग्री कॉलेज, ठाकुरगंज (किशनगंज) में स्नातक सत्र 2026-30 के नामांकन एवं पंजीयन प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से अतिरिक्त शुल्क वसूली और छात्रों के शोषण के आरोपों को लेकर छात्र नेता सौरभ कुमार ने शनिवार को विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष (डीएसडब्ल्यू) प्रो. अरविंद कुमार वर्मा से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जांच समिति गठित करने तथा दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की।

सौरभ कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा जारी नामांकन निर्देश के अनुसार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों तथा सभी वर्ग की छात्राओं का नामांकन पूरी तरह निःशुल्क निर्धारित है। इसके बावजूद महाविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्राओं से “प्रैक्टिकल शुल्क” के नाम पर ₹600 तक की राशि लिए जाने की शिकायत सामने आई है। कई मामलों में अतिरिक्त राशि वसूले जाने और उसकी वैध रसीद उपलब्ध नहीं कराए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा पंजीयन शुल्क ₹600 निर्धारित किया गया है, लेकिन महाविद्यालय परिसर में पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध नहीं कराकर छात्रों को एक विशेष निजी साइबर कैफे भेजा जा रहा है, जिसे कॉलेज का अधिकृत ऑपरेटर बताया जाता है। आरोप है कि उक्त साइबर कैफे द्वारा पंजीकरण के नाम पर ₹800 वसूले जा रहे हैं तथा अतिरिक्त ₹200 की राशि की कोई आधिकारिक रसीद नहीं दी जा रही है।

छात्र नेता ने आरोप लगाया कि महाविद्यालय से संबंधित कई प्रशासनिक एवं ऑनलाइन कार्य, जो कॉलेज परिसर के काउंटर से होने चाहिए, उन्हें बाहरी निजी माध्यम से कराया जा रहा है। इससे छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है और वे मानसिक रूप से भी परेशान हो रहे हैं।उन्होंने डीएसडब्ल्यू से मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, अवैध रूप से वसूली गई राशि की जांच कर दोषी व्यक्तियों एवं संबंधित कर्मियों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही कॉलेज के अधिकृत ऑपरेटर को महाविद्यालय परिसर में बैठाकर सभी पंजीकरण एवं ऑनलाइन कार्य कॉलेज काउंटर से कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

सौरभ कुमार ने यह भी कहा कि छात्रों को शिकायत करने पर एफआईआर और केस की धमकी देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोपों की भी जांच होनी चाहिए। भविष्य में किसी भी प्रकार की अवैध वसूली पर रोक लगाते हुए नामांकन एवं पंजीयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए तथा प्रत्येक भुगतान की वैध रसीद देना अनिवार्य किया जाए।उन्होंने उम्मीद जताई कि छात्रहित, न्याय और शिक्षा व्यवस्था की गरिमा को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन इस गंभीर मामले में शीघ्र उचित कदम उठाएगा।