किशन, पूर्णिया: पूर्णिया विश्वविद्यालय, पूर्णिया में पीएचडी प्रवेश परीक्षा (PAT) 2024 एवं PAT 2025 को लेकर शोधार्थी छात्रों में गहरी नाराज़गी देखी जा रही है। इस संबंध में शोधार्थी छात्र रवि गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा PAT-2024 के लिए 18 दिसंबर 2024 को आवेदन आमंत्रित किए गए थे, जिसे किसी कारणवश बाद में स्थगित कर दिया गया। दुर्भाग्यवश, एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जिससे यह प्रतीत होता है कि विश्वविद्यालय छात्र हितों के प्रति गंभीर नहीं है।
उन्होंने आगे बताया कि आवेदन प्रक्रिया के दौरान विश्वविद्यालय द्वारा विषयवार रिक्तियों की जानकारी भी ली गई थी, ऐसे में अब विश्वविद्यालय को अविलंब पहल करते हुए PAT परीक्षा का आयोजन करना चाहिए। साथ ही, नव नियुक्त एसोसिएट प्रोफेसरों को पीएचडी सुपरवाइज़र बनने की अनुमति दी जानी चाहिए, जिससे सीटों में वृद्धि हो सके। इससे भूगोल, रसायन विज्ञान, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, गृह विज्ञान, हिंदी, अंग्रेज़ी सहित अन्य विषयों में अधिक सीटें उपलब्ध होंगी और क्षेत्र के विद्यार्थियों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
वहीं छात्र नेता विकास कुमार ने कहा कि एक वर्ष बीत जाने के बावजूद जिन छात्रों ने PAT के लिए आवेदन किया था, वे आज भी परीक्षा की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसी उम्मीद में उन्होंने किसी अन्य विश्वविद्यालय में आवेदन नहीं किया, जिससे वे स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। विश्वविद्यालय में जमा किया गया शुल्क भी अब तक चर्चा का विषय नहीं बना है, जो गंभीर चिंता का विषय है। छात्र नेता कुंदन कुमार ने कहा कि यह क्षेत्र आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है और उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ही पूर्णिया विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। ऐसे में पीएचडी नामांकन प्रक्रिया को शीघ्र प्रारंभ किया जाना चाहिए, ताकि छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा से वंचित न रहें। इस अवसर पर सतीश कुमार, मणिकांत कुमार, सोनू कुमार, जितेंद्र कुमार, सागर कुमार, संतोष कुमार, संजीव कुमार सहित कई छात्र उपस्थित थे।



