कोशी के अपर विद्यापति पंडित मधुकान्त झा मधुकर की 102 वीं जयन्ती आयोजित

102nd birth anniversary of Upper Vidyapati Pandit Madhukant Jha Madhukar of Koshi celebrated

सहरसा,अजय कुमार /

बाबा नीलकंठ के अनन्य भक्त, हिन्दी, संस्कृत एवं मैथिली के प्रकाण्ड विद्वान पंडित कोशी के विद्यापति मधुकान्त झा” मधुकर का जयन्ती पर्व है। मिथिलांचल में अपर विद्यापति के रूप में लब्धप्रतिष्ठ मधुकर जी का जन्म सहरसा जिले के चैनपुर गांव में 19 जनवरी 1924 में हुआ था। अपनी विविधरंगी रचनाओं के माध्यम से उन्होंने जनमानस में भक्ति की एक ऐसी लहर का निर्माण किया जो पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों को अनुप्राणित करती रहेगी।

उनकी रचनाओं में साहित्य की सभी विधाओं का संतुलित सम्मिश्रण देखने को मिलता है। लौकिकता में रचे-बसे इनकी रचनाओं में कहीं भक्ति की धारा प्रवाहित हैं तो कहीं बारहमासा का मनमोहक चित्रण।कहीं देशभक्ति की उदात्त भावनाएँ हैं तो कहीं दीन-दुखियों का आर्तनाद फूटता है।

उनकी बहुआयामी कविताएँ, पाठकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ती हैं। इनकी प्रकाशित पुस्तकों और संकलित रचनाओं में प्रमुख हैं अभिनव नवीन नचारी, मधुकर माधुरी, नीलकंठ मधुकर पदावली इत्यादि।अपनी सादगी से भरपूर दिनचर्या और मर्मस्पर्शी रचनाओं के माध्यम से वे अनन्त काल तक जन-मानस में जीवन्त रहेंगे।

चैनपुर में अवस्थित उनकी मधुकर कुटी” में हर वर्ष 19 जनवरी को उनकी जयन्ती मनाई जाती है। बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों, मैथिली, हिन्दी और संस्कृत के विभिन्न विद्वानों एवं साहित्यकारों एवं शोधकर्ताओं ने मिथिलांचल के इस महान विभूति को आज इनकी 102 वीं जयन्ती पर्व पर शत-शत नमन अर्पित किया है।