पूर्णिया : यूजी प्रथम सेमेस्टर की दूसरी पाली की परीक्षा अचानक स्थगित होने की सूचना ने पूर्णिया विश्वविद्यालय के अधीन आने वाले चारों जिलों—कटिहार, किशनगंज, अररिया और पूर्णिया—के लगभग सभी परीक्षा केंद्रों पर उबाल ला दिया। सुबह से केंद्रों पर पहुंचे छात्र-छात्राओं को जब मौके पर बताया गया कि परीक्षा नहीं होगी, तो कई जगह नारेबाजी, धरना और सड़क जाम तक की स्थिति बन गई।
विद्यार्थियों का कहना था कि परीक्षा स्थगन की कोई पूर्व आधिकारिक सूचना उन्हें नहीं मिली। अधिकांश छात्र दूर-दराज़ गांवों से किराया खर्च कर समय से पहले केंद्र पहुंचे थे। कई छात्राएं अभिभावकों के साथ आई थीं। केंद्र पर पहुंचकर परीक्षा रद्द होने की खबर मिलना उनके लिए आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से भारी पड़ा।
कटिहार, किशनगंज, अररिया और पूर्णिया—चारों जिलों में एक जैसी तस्वीर दिखी। छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रबंधन में समन्वय की कमी और सूचना तंत्र की विफलता ने उन्हें सड़कों पर उतरने को मजबूर किया। कुछ केंद्रों पर घंटों तक अफरा-तफरी रही और पुलिस-प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ। आक्रोश इतना बढ़ा कि कुछ स्थानों पर छात्रों ने प्रतीकात्मक विरोध में अपने एडमिट कार्ड तक जला दिए।

प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का कहना था कि परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में अंतिम समय पर लिया गया यह निर्णय घोर लापरवाही दर्शाता है। उनका आरोप था कि पहले भी परीक्षा केंद्र निर्धारण, समय-सारणी और व्यवस्थाओं को लेकर भ्रम की स्थिति बनती रही है, लेकिन इस बार छात्रों को केंद्र तक बुलाकर परीक्षा रद्द करना विश्वास पर चोट जैसा है।
छात्रों ने मांग की कि नई परीक्षा तिथि तुरंत घोषित की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तय किया जाए। समय पर सूचना, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर उनका विशेष जोर रहा, ताकि छात्रों को अनावश्यक परेशानी न झेलनी पड़े।
यह घटनाक्रम विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। चार जिलों के लगभग सभी केंद्रों पर एक साथ उपजा आक्रोश इस बात का संकेत है कि समस्या किसी एक जगह तक सीमित नहीं थी, बल्कि व्यवस्था के स्तर पर चूक हुई। अब छात्रों और अभिभावकों की नजर इस पर टिकी है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस चूक की जिम्मेदारी कैसे तय करता है और भरोसा बहाल करने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।



