PURNIA NEWS अभय कुमार सिंह : नारी सशक्तीकरण की मिशाल बनकर, अपने नाम के स्वरूप मध्यविद्यालय, धूसर की प्रधानाध्यापिका अलका कुमारी शिक्षा के क्षेत्र को आलोकित करती दिख रही हैं । धूसर मध्यविद्यालय के इतिहास में आजतक जो किसी प्रधानाध्यापक ने नहीं किया था, वह कर दिखायी हैं । वह ना सिर्फ विद्यालय की हडपी गई लगभग पौने चार एकड जमीन को विद्यालय के कब्जे में लिया, बल्कि मनरेगा योजना से अपने विद्यालय प्रांगण में विकास करके चार-चांद लगाने की कोशिश भी की हैं । कलतक जिस विद्यालय में गंदगी का अंबार लगा रहता था, आज वह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं दिखता है । साथही जो शिक्षक पढाने के बदले फरार रहा करते थे तथा हाजिरी बनाकर चले जाते थे, वे आज बच्चों को पढाते नजर आते हैं । इसके लिए सिर्फ धूसर गांव में ही नहीं, बल्कि आसपास के लिए भी वह प्रेरणा की श्रोत बन गई हैं । लोगों में जैसे ही विद्यालय की चर्चा होती है, वैसे ही अलका का नाम जरूर लेते हैं कि प्रधानाध्यापक हो तो अलका जैसा कहने से नहीं चूकते हैं।
गांव की गंदी राजनीति से कोई भी शिक्षक विद्यालय का प्रभार नहीं लेना चाहते थे-
31 दिसंबर 2023 को जब यहां के पूर्व प्रधान सेवानिवृत हुए, तब इस गांव के ही वरीय शिक्षक नवनीत कुमार, गांव की गंदी राजनीति के कारण प्रधानाध्यापक के पद पर बैठने की हिम्मत नहीं जूटा पाए थे । तब अंत में सभी ने जबरन कनिय शिक्षिका अलका कुमारी को इस पद पर बैठाया । 1 जनवरी 2024 को जैसे ही वह इस पद पर आसीन हुईं, गांव की गंदी राजनीति हावी होने लगी तथा जैसा कि हर गांव में प्रधानाध्यापक के साथ प्रायः होता रहता है, इनके साथ भी वैसा ही प्रयास करने की कोशिश की जाने लगी । परंतु इच्छा-शक्ति एवं आत्मविश्वास की मजबूत अलका का पग अंगद की पांव की तरह अडिग रहा तथा अर्जुन की तरह बस उन्हें अपना लक्ष्य विद्यालय का विकास एवं शिक्षा व्यवस्था में सुधार कैसे हो, इसपर केंद्रित रहा । विरोधी कुछ दिनों तक काफी परेशान किये, परंतु फिर उनका कडा रूख एवं दृढ इच्छा-शक्ति देखकर सामने आने से परहेज करने लगे ।
प्रथम लक्ष्य था शिक्षण व्यवस्था में सुधार कैसे हो-
आदत के अनुसार यहां के शिक्षक बच्चों को पढाने के बजाय, मोबाइल देखने, मटरगस्ती करने, गांव की राजनीति में शामिल होने के कारण गांव वालों की नजर में गिरे हुए थे, में सुधार लाने का प्रयास करने लगीं । शिक्षक मनमाने समय से आते थे, हाजिरी बनाकर निकल जाते थे, इसपर कडाई से रोक लगाया, यद्यपि इसपर शिक्षकों से भी इन्हें काफी विरोध का सामना करना पडा, परंतु उनके सामने किसी भी शिक्षक की एक नहीं चली तथा पठन-पाठन में व्यापक सुधार हुआ, जिससे इनकी चर्चा आम होने लगी । पठन-पाठन में सुधार होते देख, ग्रामीण अब इनके पक्ष में खडे होने लगे तथा सहयोग करने लगे ।
विद्यालय के बेतरतीब स्वरूप को संवारा-
जिस समय उन्होंने विद्यालय का पदभार संभाला था, तब यह विद्यालय किसी कबाडखाना से कम नहीं दिखता था, उन्होंने इसे सजाने का काम शुरू किया । विद्यालय आवर के बाद वह पंचायत की मुखिया सुलोचना देवी से मिलकर विद्यालय में विकास का सहारा लिया । मुखिया सुलोचना देवी ने भी उनका भरपूर सहयोग किया तथा पंचायत की योजना से विद्यालय के प्रांगण को सजाने लगीं हैं, जो अभी तक जारी है । विद्यालय घुसते ही फूलों की क्यारियां, साग-सब्जी, फलदार पौधों को देख लोगों का मन हरा-भरा हो जाता है ।
ग्रामीणों द्वारा हडपी गई पौने चार एकड जमीन को विद्यालय के कब्जे में लिया है-
विद्यालय की व्यवस्था सुदृढ होने के बाद उनका ध्यान विद्यालय की जमीन पर गई, तब मालूम हुआ कि विद्यालय प्रांगण से सटे तथा विद्यालय की जमीन को छोडकर लभभग पौने चार एकड जमीन विद्यालय की है । उन्होंने सीओ सहित अन्य अधिकारियों को इसकी जानकारी दी तथा प्रशासन की सहायता से वह ग्रामीणों द्वारा हडपी गई सभी जमीनें विद्यालय के कब्जे में ली हैं । इसमें से कुछ जमीन के लिए अभी प्रोसेस में है । यद्यपि आज जब खेतों के आर के लिए लोग खून बहाने से नहीं चूकते हैं, फिर पौने चार एकड जमीन कब्जा में लेने के लिए उन्हें कितना विरोध सहना पडा होगा, यह सभी जानते हैं ।
शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है विद्यालय-
कक्षा के अनुसार इस विद्यालय में कम-से-कम आठ शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए । यहां 309 बच्चें नामांकित हैं । प्रधानाध्यापक को इतने सारे कार्य दे दिये गए हैं कि उसी से प्रायः उन्हें फूर्सत नहीं मिल पाती है कि वे बच्चों को क्या पढा पाएंगे । ऐसी परिस्थिति में इस विद्यालय में शिक्षकों की कमी खल रही है तथा बच्चे समुचित पढाई से वंचित हो रहे हैं । यहां और शिक्षकों की नियुक्ति जरूरी हो गई है । यहां उनके सहित मात्र 7 शिक्षक नवनीत कुमार, नीतू कुमारी, सोनी कुमारी, अनुराधा कुमारी, पूनम कुमारी एवं चंदन कुमार ही कार्यरत हैं ।
कहती हैं प्रधानाध्यापिका अलका कुमारी-
प्रधानाध्यापिका अलका कुमारी कहती हैं कि नारी सषक्तिकरण की दिशा में उनका पग आगे बढ चूका है । जब मन में चोर नहीं है, फिर आत्मविष्वास कैसे लोग डिगा सकते हैं । उनका यह भी लक्ष्य है कि जितनी जमीन इस विद्यालय को है, वैसी स्थिति में यहां बच्चियों के लिए एक कन्या हाईस्कूल खोला ही जा सकता है, जो यहां के दस किलोमीटर की परिधि में इस गरीब क्षेत्र के बच्चियों के लिए एक सौगात से कम नहीं होगा । वह बच्चों के प्रति जवाबदेह हैं, बच्चों को समुचित शिक्षा उपलब्ध कराना उनका दायित्व एवं मंजिल भी है । यद्यपि वह सरकार द्वारा पिछले कुछ माह पहले ली गई प्रधान शिक्षक की परीक्षा में वह सफल हो गई हैं तथा वह कभी भी यहां से जा सकती हैं । परंतु वह जबतक यहां रहेंगी, तबतक अपने लक्ष्य को डिगने नहीं देंगी । उनका विद्यालय आवर में पूरा समय बच्चों के लिए ही रहेगा । उनका लक्ष्य वह विद्यालय की जमीन की सारी अडचनें दूर कर, वह आनेवाले प्रधान को सौंप देंगी, ताकि उन्हें भविष्य में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हो । वैसे भी यह विद्यालय उनकी ससुराल गांव का विद्यालय है , इस परिस्थिति में बहु की जिम्मेदारी तो बनती ही है ।




